भारत सेवक शिक्षा सदन इण्टरमीडिएट कॉलेज, आरमापुर, कानपुर का शुभारम्भ RAF कैम्प के एक कमरे में 15 छात्राओं से आयुध निर्माणी कानपुर के कर्मचारी स्व. देवीशरण पाण्डेय जी एवं स्व. उदयभान सिंह जी की देखरेख में वर्ष 1965 में हुआ था।
छात्रों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ विद्यालय में 3 शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं। अध्यापकों के अथक परिश्रम एवं आरमापुर निवासियों के सहयोग से तथा समाज सेवी स्व. देवीशरण पाण्डेय जी स्व. उदयभान सिंह जी के कठिन परिश्रम से 4 कमरों में सीमेंट की चादरें डालकर छात्रों के बैठने की व्यवस्था की गयी।
प्रधानाध्यापक एवं सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं के कठिन परिश्रम से विद्यालय का परीक्षाफल हमेशा शत-प्रतिशत रहा है। स्व. देवीशरण पाण्डेय जी के निधन के पश्चात् श्री प्रदीप कुमार सिंह को विद्यालय का प्रबंधक सर्वसम्मति से बनाया गया।
छात्रों की संख्या बढ़ने पर आयुध निर्माणी के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री पी.वी. रामचंद्रन जी की असीम अनुकम्पा से विद्यालय को 4 और कमरों के लिए सीमेंट की चादरें, पाइप आदि सामग्री प्राप्त हुई।
वर्ष 1982 में विद्यालय को जूनियर हाई स्कूल तक की अस्थाई मान्यता प्राप्त हुई। विद्यालय का स्वच्छ, शैक्षिक वातावरण देखकर भवन निर्माण हेतु आयुध निर्माणी के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री जे.बी. सक्सेना जी ने विद्यालय को काफी सामग्री प्रदान की।
वर्ष 1988 में विद्यालय को जूनियर हाई स्कूल की स्थाई मान्यता शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश, इलाहबाद द्वारा प्रदान की गयी।
विद्यालय को माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा वर्ष 1994 में हाई स्कूल तथा वर्ष 2002-2003 में इण्टरमीडिएट की मान्यतता प्रदान की गयी।
वर्तमान समय में विद्यालय में इण्टरमीडिएट तक मानविकी तथा विज्ञान वर्ग की कक्षाएं अतिरिक्त विषय गृह विज्ञान के साथ संचालित हैं।